Laws of chemical combination || gk questions

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Laws of chemical combination

परिचय (Introduction) :-

वैज्ञानिको द्वारा यौगिकों की मात्रात्मक विधि सत्यता स्थापित करने के लिए अनेको प्रयास किए गए तथा इस आधार पर वह पाया गया कि प्रत्येक रासायनिक अभिक्रिया कुछ नियमो के आधार पर होती है , ये नियम रासायनिक संयोग के नियम कहलाते है |

द्रव्यमान संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Mass) :-

यह नियम रासायनिक अभिक्रिया के दौरान अभिकारकों तथा उत्पादों के द्रव्यमान में सम्बन्ध स्थापित करता है | इस नियम को सन 1756 में लेवोशिए नमक रसायनज्ञ ने प्रतिपादित किया | इस नियम के अनुसार “रासायनिक परिवर्तन में भाग लेने वाले पदार्थो का कुल द्रव्यमान परिवर्तन के पश्चात बने बने हुए पदार्थो के कुल द्रव्यमान के बराबर होता है |”

अथवा

“रासायनिक परिवर्तन में द्रव्य न तो उत्पन्न होता है और नहीं नष्ट होता है | उसके केवल रूप या अवस्था में परिवर्तन हो सकता है |”

उदहारण:- 12 ग्राम कार्बन, 32 ग्राम ऑक्सीजन से संयोग करके 44 ग्राम कार्बन डाई ऑक्साइड देता है |

इस नियम की पुष्टि लैन्डोलट के प्रयोगो की सहायता से की जा सकती है |

आधुनिक अनुसंधानों के प्रकाश में द्रव्य की अविनाशिता का नियम :-

आधुनिक खोजो से यह सिद्ध हो चूका है कि द्रव्य को ऊर्जा में परिवर्तित किया जा सकता है | प्रत्येक अभिक्रिया में कुछ ऊर्जा उतपन्न होती है , जिससे द्रव्यमान में कमी हो जाती है | द्रव्य का ऊर्जा में परिवर्तन आइंस्टीन के समीकरण द्वारा ज्ञात किया जा सकता है |

E = mc 2

जंहा, E = ऊर्जा, m = पदार्थ का द्रव्यमान, c = प्रकाश का वेग

किन्तु हो रासायनिक क्रियाए हम प्रयोगशाला में करते है , उनमे बहुत ही कम ऊर्जा उतपन्न या अवशोषित होती है, इसलिए द्रव्य की मात्रा में बहुत कम कमी या वृद्धि होती है, जो नगण्य है | इस प्रकार के परिवर्तन नाभिकीय अभिक्रियाओ में स्पष्ट देखे जाते है | साधारण क्रियाओ के लिए हम द्रव्य की अविनाशिता के नियम को सत्य मान सकते है |

नाभिकीय अभिक्रियाएँ ( नाभिकीय विखंडन, नाभिकीय संलयन ) द्रव्यमान संरक्षण के नियम पर आधारित नहीं होती है | (Laws of chemical combination || gk questions)

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स्थिर अनुपात नियम (Law of Constant Proportions) :-

फ्रैंच वैज्ञानिक जे० एल० प्राउस्ट ने सन 1799 में स्थिर अनुपात के नियम का प्रतिपादन किया | इस नियम के अनुसार,

“रासायनिक यौगिकों में उनके अवयवी तत्व , भार की दृष्टि से सदैव एक निश्चित अनुपात में रहते है |”

प्राउस्ट ने यह सिद्ध किया कि किसी यौगिक को चाहे किसी भी विधि द्वारा बनाया जाए , उसमे उपस्थित अवयवी तत्वों का अनुपात सदैव निश्चित रहता है |

उदाहरण:- विभिन्न स्थानों जैसे नदियों, झरनो, कुओ, आदि में जल को लेकर शुद्ध करने के पश्चात विश्लेषित किया गया | विश्लेषण से यह ज्ञात हुआ कि पानी के प्रत्येक नमूने में हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन द्रवमान के अनुसार 2:16 या 1:8 में है |

इस नियम का व्युत्क्रम सही नहीं होता है |

गुणित अनुपात का नियम (Law of Multiple Proportions) :-

इस नियम का प्रतिपादन सन 1803 में जॉन डाल्टन ने किया | इस नियम के अनुसार ,

“जब दो तत्व आपस में संयोग करके दो या दो से अधिक यौगिक बनाते है, तो एक तत्व के भिन्न-भिन्न द्रव्यमन जो दूसरे तत्व के निश्चित द्रव्यमान में संयोग करते है , सदैव सरल अनुपात में होते है | “

उदहारण:- कार्बन और ऑक्सीजन परस्पर संयोग करके कार्बन मोनो ऑक्साइड तथा कार्बन डाई ऑक्साइड बनाते है | कार्बन मोनो ऑक्साइड में 12 भाग कार्बन, 16 भाग ऑक्सीजन से संयोग करता है | कार्बन डाई ऑक्साइड में 12 भाग कार्बन, 32 भाग ऑक्सीजन से संयोग करता है |

इस उदाहरण में ऑक्सीजन के भिन्न-भिन्न द्रव्यमान, कार्बन के एक निश्चित अनुपात से संयोग करते है | ऑक्सीजन के विभिन्न द्रव्यमान 16 , 32 जो कार्बन के निश्चित द्रव्यमान 12 से संयुक्त होते है | 1:2 सरल अनुपात में है |

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व्युत्क्रम अनुपात का नियम (Law of Reciprocal Proportions) :-

इस नियम को जे० बी० रिचर ने सन 1792 में निम्न प्रकार प्रतिपादित किया :-

“यदि दो भिन्न-भिन्न तत्व किसी तीसरे तत्व के निश्चित द्रवमान से अलग-अलग संयोग करते है तो उन तत्वों के द्रव्यमान या तो उसी अनुपात में होंगे , जिसमे वे दोनों आपस में संयोग करते है अथवा यह अनुपात उनके संयोग करने वाले द्रव्यमानो के अनुपात का सरल गुणक होगा |”

उदहारण :- दो तत्व कार्बन और सल्फर अलग-अलग एक तीसरे तत्व ऑक्सीजन से संयोग करके कार्बन डाई ऑक्साइड तथा सल्फर डाई ऑक्साइड बनाते है तथा परस्पर संयोग करके कार्बन डाई सल्फाइड बनाते है | कार्बन डाई ऑक्साइड में 12 भाग कार्बन, 13 भाग ऑक्सीजन से संयोग करता है | सल्फर डाई ऑक्साइड में 32 भाग सल्फर तथा 32 भाग ऑक्सीजन से संयोग करता है |

कार्बन और सल्फर का अनुपात जो ऑक्सीजन के निश्चित द्रव्यमान से संयोग करता है | (Laws of chemical combination || gk questions)

गै-लुसैक का गैस आयतन संबन्धी नियम (Gay-Lussac’s Law of Combining Volumes) :-

इस नियम को गै-लुसैक ने प्रतिपादित किया था | यह नियम रासायनिक अभिक्रिया के दौरान अभिकारकों तथा उत्पादों के आयतन के मद्य संबन्ध स्थापित करता है | , इस नियम के अनुसार,

“जब जैसे आपस में संयोग करती है तो उनके आयतनों में सरल अनुपात होता है और यदि उनके संयोग से बना हुआ पदार्थ भी गैस ही हो, तो उसका आयतन भी अभिकारी गैसों के आयतनों के सरल अनुपात में होता है ” (जब सभी आयतन समान ताप व दाब पर मापे जाये) |

आवोग्रादो नियम (Avogadro’s Law) :-

इस नियम के अनुसार ताप तथा दाब की समान परिस्थितियों में सभी गैसों के समान आयतनों में अणुओं की समान संख्या होती है | (Laws of chemical combination || gk questions)

आवोग्रादो संख्या :- यह किसी पदार्थ के 1 ग्राम मोल में उपस्थित सूत्रीय इकाईयो की संख्या होती है |

N=6.023 * 10’23

इसकी खोज आवोग्रादो ने नहीं की थी | इसे केवल सम्मान में आवोग्रादो नाम दिया गया था |

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